ग्वालियर-चंबल से लौटकर प्रमोद कुमार त्रिवेदी. अब ग्वालियर-चंबल बीहड़ों और डकैतों के लिए नहीं जाना जाता। सामाजिक बदलाव के चलते यहां अपराध भी कुछ कम हुए हैं, लेकिन एक नए अपराध ने जन्म लिया है। अवैध रेत का कारोबार। यहां दिनदहाड़े अवैध रेत का उत्खनन और परिवहन हो रहा है। खुलेआम अवैध रेत की मंडी लग रही है। प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर करोड़ों का वारे-न्यारे करने वाला यह अवैध व्यवसाय बंदूक की दम से ज्यादा नेताओं और पुलिस की पार्टनरशिप में फल-फूल रहा है। इस क्षेत्र के ज्यादातर नेता और उनके समर्थक रेत के कारोबार से जुड़े हैं।
संभागीय मुख्यालय ग्वालियर हो या दतिया-भिंड। रोज अवैध रेत की मंडी लगती है। दिन में भी रेत से लदे डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क पर देखे जा सकते हैं, जो रात होते-होते सैकड़ों की संख्या में पहुंच जाते हैं। अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की कमाई का लालच ऐसा है कि सिंध और चंबल नदी के किनारे बसे तकरीबन 350 गांव के 10 हजार से ज्यादा परिवारों ने अवैध रेत के व्यवसाय को अजीविका का साधन बना लिया है।
बात सरकार की करें तो उसके मंत्री खुलकर पुलिस पर अवैध परिवहन का आरोप लगा रहे हैं तो कांग्रेस के ही विधायक एक मंत्री के अवैध उत्खनन में शामिल होने का दावा कर रहे हैं। कांग्रेस के कद्दावर मंत्री गोविंद सिंह ने खुलकर चंबल आईजी पर अवैध उत्खनन-परिवहन का आरोप लगाया तो गोहद विधायक रणवीर जाटव ने गाेविंद सिंह पर रेत माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगा दिया। अवैध रेत के कारोबार पर सत्तासीन नेताओं के बयान आए तो भास्कर ने चंबल में पैर पसार चुके अवैध रेत के कारोबार और नेता-पुलिस के बीच चल रही नूरा-कुश्ती की पड़ताल की।
भास्कर पड़ताल : रेत माफिया नहीं, बल्कि प्रशासन खौफ के साये में
हमने देखा कि मुरैना में अवैध रेत माफिया नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन खौफ के साये में है। मुरैना में शहर के बीचों-बीच अवैध रेत की मंडी लगती है और उत्तर प्रदेश-राजस्थान के लिए रेत के डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली जाते हैं। भिंड में सिंध के किनारे तकरीबन हजार करोड़ की रेत डंप है। ग्वालियर में रात में रेत के डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली खुलेआम निकल रहे हैं। दतिया के तीन थाना क्षेत्रों में रेत की मंडी लग रही है।
भिंड में माफियाओं के पास करोड़ों की अवैध रेत
भिंड जिले में सिंध नदी से लगा ऐसा कोई भी गांव नहीं, जहां अवैध रेत के डंप न हों। मुरैना के बाद भिंड पहुंचे तो यहां रेत के डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों पर अवैध परिवहन करते दिखे। हम रेत माफियाओं के पास पहुंचे और उनसे कहा कि हमें कुछ घाट देखना है। हम नीलामी में ठेके लेना चाहते हैं। गांवों के कुछ रास्ते भी देखना चाहते हैं। हमने रेत माफियाओं को पार्टनरशिप का ऑफर भी दिया। उन्हें बताया कि नई रेत नीति में बड़े ठेके होंगे तो तुम्हें भी साथ रखकर काम करेंगे। रेत ठेकेदार हमें क्षेत्र दिखाने के लिए तैयार हो गए और हम अपनी गाड़ी से चल पड़े बरोही थाना क्षेत्र के गांवों की तरफ। हम भिंड शहर से 12 किलोमीटर ही चले थे कि तकरीबन 300 डंपर रेत का डंप दिखा। माफिया ने बताया कि ये अवैध डंप है। यहां इकट्ठा करते हैं और वाहनों से सप्लाई करते हैं। थाेड़ा आगे निकलने पर एक डंपर दिखा, जिसमें से पानी टपक रहा था। माफिया ने बताया कि ये नदी में पनडुब्बी लगाकर रेत निकाली गई है और सीधे डंपर में भरी गई है। इसीलिए पानी टपक रहा है।
सड़क किनारे रेत के ढेर
बरोही थाने के 500 मीटर पहले और बाद में भी सड़क किनारे रेत के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए थे। आगे जाने पर भरोली कलां, भारोली खुर्द, गोरमी, गोरम, अड़ोखरा, अमायन, अजीता, राजवरेठी गांव आए। इन सभी गांव में सैकड़ों डंपर रेत का अवैध भंडार था। ये गांव मेहगांव विधानसभा में आते हैं। इंद्रखी के पहले सिंध नदी के पुल पर पहुंचे तो देखा कि रेत माफिया खुलेआम पनडुब्बी लगाकर रेत का अवैध उत्खनन कर रहे थे। हमारी गाड़ी मंे बैठे रेत माफिया हमें प्रशासन-पुलिस और नेताओं की मिलीभगत की कहानी सुनाते रहे। रेत के अवैध अंबार को देखते हमइंद्रखी, निवासाई, खैरा, श्यामपुर, ढोंचरा पहुंचे। ये गांव भिंड विधानसभा में आते हैं। इसके बाद अजनार, मढोरी, छोटी मटयावली, बड़ी मटयावली, परांच गांव पहुंचे। इन गांवों में भी रेत के ढेर और पहरेदार दिखे। हमारी गाड़ी में रेत माफिया को देखकर गांव वालों ने हमें भी अपना साथी समझा। रेत माफिया ने बताया कि अगर हम साथ नहीं होते तो ये अनजान व्यक्ति को देखते ही हमला कर देते हैं। पुलिस-प्रशासन के लोगों को भी नहीं छोड़ते।